आम का शरबत स्क्वैष एवं अचार बनाने का प्रषिक्षण सम्पन्न

पन्ना 26 मई 18/साग भाजी एवं फल परिक्षण केन्द्र इन्दौर के प्रषिक्षण अधिकारी श्री ललित भटनागर ने बताया की फलों के राजा आम गर्मी में बहुतायत से आता है तथा इसके कृषि एवं उत्पादन में विष्व में सर्वाधिक आम भारत में होता है। इसके फल से मुरब्बा, स्क्वैष, नेक्टर, अचार, चटनी, अमावट (आम के पापड़ ) अमचुर जैसे परिरक्षित पदार्थ तैयार किये जाते है। आम के फाकों की केंनिग की जाती है। आज-कल बाजार में अनेक व्यावसायिक नाम से कच्चे आम को रसायनिक दवाइयों (प्रिजर्ववेटीव) द्वारा उपचारित कर बाजार में महगें रस उपलब्ध है, किन्तु घरेलू स्तर पर पके आम का स्क्वैस एवं शरबत बनाकर पोष्टीक रस उपयोग किया जा सकता है।

    उन्होंने बताया कि गर्मी की लू से बचने के लिये कच्चे आम का पना रामबाण औषधि है, जो की घरों में बाटलों में पैकिंग करके रखा जा सकता है। गुजरात में आपुस एवं केसर किस्म के आम को रस डी-हाईड्रेड (गर्म कर) नमी को हटाकर वायु रोधी (एयर टाइट) बाटल में भर कर रखने से एक वर्ष तक आम का रस सुरक्षित रहता है, इसमें किसी भी प्रकार का प्रिजरवेटिव नही डालते है। आज प्रषिक्षण के दौरान आम का स्क्वैस एवं शरबत बनाया गया तथा वैज्ञानिक विधि द्वारा आम का अचार भी बनाया गया। प्रषिक्षणार्थी महिलाओं द्वारा अपने-अपने अनुभव सुनाये गये। इस अवसर पर ग्रामीण उद्यान विस्तार अधिकारी श्रीमति आरती सिंह, कुमारी सोनाली असाटी, तेजस्वनी के श्री रामाधार, उद्यानकी विभाग के सहायक संचालक उद्यान श्री महेन्द्र मोहन भट्ट एवं श्री संजीव सिंह जिला योजना प्रबंधक उपस्थित थे। कल तेजस्वनी की महिलाओं द्वारा सिखाऐ परिरक्षित उत्पाद स्वयं द्वारा बनाकर प्रयोगिक कार्य किया जायेगा।
समाचार क्रमांक 304-1502

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