पेट के समस्त रोगांे के लिये गुणकारी है बेल का शरबत-श्री भटनागर आम का आचार एवं आंवले के च्वयनप्राश का प्रषिक्षण आज

पन्ना 25 मई 18/बेल औषधीय एवं पौषक तत्व से भरपूर है, तथा भगवान षिव को अतिप्रिय होने के कारण धार्मिक भावनाओं से जुडा हुआ फल है। पूर्ण पका हुआ फल पीला होता है, फल में कार्बोहाईड्रेट, फास्फोरस, प्रचूर मात्रा में पाये जाते है। पके हुये फल का रस तीक्ष्ण, कषाय, मीठा, क्षुधार्वधक, फलवर्धक, ज्वर दर्दनाषक तथा वात और कफ दूर करता हैं। हृदय के लिये लाभदायक है एवं प्यास शांत करता है। पुरानी आॅव तथा अतिसार में अन्यंत गुणकारी पेट के समस्त रोगांे के लिये महत्वपूर्ण औषधीय है। यह जानकारी बेल के शरबत निर्माण के प्रशिक्षण के समय इन्दौर से आये सागभाजी एवं फल प्रषिक्षण केन्द्र के वैज्ञानिक श्री ललित भटनागर ने दी। 

  श्री भटनागर ने बताया कि यदि आचार को हमें सूक्ष्म जीवाणुओं से बचाना है तथा एक वर्ष के लिये संग्रहित रखने के लिए 01 किलो आम में सरसो का तेल एवं 150 ग्राम नमक की मात्रा एक दम उपयुक्त होती है। इस तरह आम के मुरब्बे बनाते समय 01 किलो आम में 700 ग्राम शक्कर डालने से साल भर के लिये संरक्षित किया जा सकता है। इस अवसर पर तेजस्वनी महिला समूह ने बेल का शरबत बनाया और समस्त प्रषिक्षणार्थियों को इसका स्वाद भी चखाया। प्रशिक्षण के दौरान मिक्सट फ्रूड जैम, खजूर का आचार एवं इमली की चटनी का व्यवहारिक प्रषिक्षण भी दिया गया।  तैयार उत्पादों की पैकिंग की तकनीकी जानकारी प्रायोगिक प्रषिक्षण केन्द्र इन्दौर से आये प्रयोगषाला सहायक श्री मिलनपाल द्वारा दी गई। इस अवसर पर तेजस्वनी के जिला कार्यक्रम प्रबंधक श्री संजीव सिंह एवं सहायक संचालक उद्यान श्री महेन्द्र मोहन भट्ट ने विषेष तकनीकी से प्रषिक्षणार्थियों के प्रष्नों का उत्तर दिया। सहायक संचालक उद्यान श्री भट्ट ने बताया है कि आम का आचार एवं आंवले का च्वयनप्राश का प्रषिक्षण 26 मई प्रातः 9 बजे से दिया जायेगा। 
समाचार क्रमांक 293-1491

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