तारा में पौध किस्म एवं कृषक अधिकार संरक्षण अधिनियम पर प्रषिक्षण


पन्ना 02 फरवरी 18/कृषि विज्ञान केन्द्र पन्ना द्वारा गत दिवस ग्राम तारा विकासखण्ड पन्ना में पौध किस्म एवं कृषक अधिकार संरक्षण अधिनियम पर एक प्रषिक्षण सह जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में डाॅ. बी. एस. किरार, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख तथा डाॅ. आर. के. जायसवाल वैज्ञानिक, पूर्व सरपंच, पंच एवं 158 कृषक/महिलाओं ने भाग लिया।

     कार्यक्रम में डाॅ. किरार ने स्थानीय किस्मों का संरक्षण क्यों आवष्यक है उसके बारे में कहा कि किसान लम्बे समय से धान, उडद, उडद, कोदो-कुटकी, मक्का, गेहूॅ, अलसी एवं सब्जियों को उसमें किसी विषेष गुणों के कारण पैदा करता आ रहा है। भारत सरकार ऐसे विषेष गुण रखने वाली किस्में धीरे-धीरे विलुप्त हो जाये इसलिये उन किस्मों को कृषकांे सेे सेम्पल लेकर तथा उनका आवेदन फार्म भरकर पौध किस्म एवं कृषक अधिकार संरक्षण अधिनियम के अन्तर्गत भारत सरकार द्वारा संरक्षण का कार्म कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों द्वारा कराया जा रहा है। स्थानीय किस्मांे में अलग -2 विषेषताऐं पायी जाती है। धान की कुछ स्थानीय किस्में असिंचित क्षेत्र में 60 दिन में पक जाती है तो कुछ किस्में सुगंधित तथा खाने में स्वादिष्ट और कीडे- बिमारियों भी कम लगती है इन सब विषेष गुण वाली किस्मों का संरक्षण एवं उन पर वैज्ञानिकों द्वारा अनुसंधान कर नई किस्मों में उक्त गुणों को लाया जायेगा। डाॅ. जायसवाल ने भी स्थानीय किस्में कृषकों से लेकर उनका पंजीयन की कार्यवाही की गयी। स्थानीय किस्मों को खत्म न होने देवे उनकी प्रतिवर्ष थोडी बहुत क्षेत्रफल में अवष्य उगायें और अधिक से अधिक कृषक दलहन, तिलहन, खाद्यान्य एवं सब्जियों के बीज लाकर कृषि विज्ञान केन्द्र में अपने नाम से उक्त किस्म का आवेदन भर पंजीयन कराकर स्थानीय किस्मों के संरक्षण में भारत सरकार को सहयोग प्रदान करें।
समाचार क्रमांक 22-302

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